Lance nayak shahid rajendra yadav ghughariyakhedi
Service No:2681263
Service: Army
Last Rank : Lance Naik
Unit: 18 Grenadiers
Arm/Regt : The Grenadiers Regiment
Operation : Op Vijay (Kargil)
Date of Martyrdom :May 30, 1999
BIOGRAPHY IN ENGLISH
Lance Naik Rajendra Yadav was born on 16 Nov 1969 to Shri Ramlal and Shrimati Kadvibai Yadav. Lance Naik Yadav had a very humble beginning being born in a farmer’s family with limited means. His father Ramlal Yadav was an ordinary farmer in Ghughariyakhedi village, in Khargone of Madhya Pradesh.
Lance Naik always wanted to serve in the army and pursued his dream of joining the army after finishing his studies in 1985. He got married in 1997 to Pratibha Devi. Lance Naik belonged to the Grenadiers regiment and was serving with 18 Grenadiers during the Kargil war.
Kargil War (Battle of Tololing): May 1999
On 30 May 1999, as a part of battalion operations to capture the Tololing feature, Lance Naik Rajendra Yadav’s unit, 18 Grenadiers was tasked to secure the initial foothold by capturing its forward advance where the enemy held a strongly fortified advance position. The post was located in a treacherous, mountainous terrain at about 15,000 feet and covered with snow. That night a 10-man Grenadiers team including Lance Naik Yadav began climbing towards their fortified objective with picks and axes. Sniper fire killed a JCO and when the temperature dropped to six below freezing, the mission was called off.
Maj Adhikari was leading the central arm of three 10-man teams trying to capture a bunker. Maj Adhikari led the central charge, three meters ahead of his men. The bunker fell, but Maj Adhikari was shot, 20 m short of his objective. He was fired at from two mutually supporting bunkers with universal machine guns. The officer immediately directed the rocket launcher detachment to engage the bunker and without waiting, rushed into the bunker and killed two intruders in close quarter combat.
Thereafter, the officer, displaying the presence of mind under heavy fire, ordered his medium machine gun (MMG) detachment to fix position behind a rocky feature and engage the enemy. The assault party continued to inch their way up. During this battle, Lance Naik Rajendra Singh Yadav got hit by bullets and was martyred. However, Lance Naik Yadav displaying raw courage killed five enemy soldiers before succumbing to his injuries. This battle later facilitated the capture of Point 4590. The Battle of Tololing was one of the most significant battles, were Lance Naik Yadav fought valiantly and achieved the objective at the cost of his life.
For conspicuous gallantry and supreme sacrifice, Lance Naik Rajendra Singh Yadav was posthumously awarded the Sena Medal.
Lance Naik Rajendra Yadav is survived by father Ramlal Yadav, mother Kadvibai Yadav, and wife Pratibha Devi.
AWARD
Lance Naik Rajendra Singh Yadav was awarded with Sena Medal posthumously for his bravery and supreme sacrifice during Kargil war.
Lance Naik Rajendra Singh Yadav was also given VSM(Vishisht Seva Medal) for his meritorious service to the nation.
LOCATION OF MEMORIAL
Khandwa road infront of BAL HANUMAN MANDIR ghughariyakhedi .dist Khargone MP
शहीद लांस नायक राजेन्द्र सिंह यादव का जीवन परिचय
नाम:- लांस नायक राजेंद्र यादव
जन्म:- 16 नवंबर 1969
शहादत:-30 मई 1999
शिक्षा:- बीए
सम्मान:- सेना मेडल विशिष्ट सेवा पदक
30 मई 1999 को द्रास सेक्टर में भारतीय सेना की जवाबी कार्यवाही के दौरान शहीद हुए निमाड के सपूत अमर शहीद लांस नायक राजेन्द्र सिंह यादव जी को शत शत नमन
सपूत राजेन्द्र सिंह यादव का जन्म खरगोन जिले के एक छोटे से गांव घुघरियाखेड़ी में 16 नव . 1969 को एक गरीब मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था । परिवार में दो भाईयों के अतिरिक्त तीन बहनें लक्ष्मीदेवी , एवं नर्मदा देवी है । हमारे पिता श्री रामलाल यादव एक सफल किसान के अलावा समाज सेवक , राजनीतिज्ञ भी है एवं माता श्रीमती कडवी बाई एक सफल गृहणी ।
राजेन्द्र सिंह की मिडिल तक की शिक्षा गांव में ही संपन्न हुई । तत्पश्चात् भोपाल के सुभाष हा.से. स्कूल कक्षा नवमी उत्तीर्ण करने के बाद आगे की पढाई देवी अहिल्या उ.मा.वि.क्रं . 1 खरगोन से हायर सेकेण्डरी उतीर्ण की । हा.से. उत्तीर्ण करने के पश्चात आपने खरगोन मे सेना के भर्ती केम्प में जाकर आवेदन किया जिसमें 18 जनवरी 1987 को आपका चयन 18 ग्रेनेडियर्स में कर लिया गया । जब वीर सपूत राजेन्द्र सिंह सेना में चयन होने के पश्चात एक नये उमंग और उत्साह से भरकर अपने आदर्शों शहीद भगतसिंह और सुभाष चन्द्र बोस जैसे जन नायकों के पदचिन्हों पर चलने के लिए अग्रसर हुए ।
विद्यार्थी जीवन के दौरान खुद के हाथ से बनाये गए दाल - बाफले और खिचडी उनका प्रिय भोजन था । सर्वादिक पसंदीदा व्यंजन में दीदी ( लक्ष्मीदेवी ) के हाथ की बनाई खिचडी उन्हें बेहद पसन्द थी ।
श्री यादव हंसमुख एवं सिद्धान्तप्रिय व्यक्ति थे । उन्हें अपने क्रोध को नियंत्रण में रखने की एवं विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शिक्षा अपनी मां से मिली थी । उनके चेहरे पर क्रोध के भाव नहीं । वे इतने शांत एवं सहनशील थे कि उन्होंने अपनी जिंदगी में एक भी शत्रु नहीं बनाया । वे इतने मिलनसार थे कि जहां भी जाते स्वतः सभी उनके मित्र बन जाते थे ।
गांव से जब भी वो अपनी ड्यूटी के लिए रवाना होते थे उन्हें घर से लेकर बस स्टेण्ड तक पहुँचने में पूरा एक घण्टा लगता था क्योंकि घर से लेकर बस स्टेण्ड तक जितने भी घर पडते थे उनमें जाकर उनके हालचाल पूछना एवं बुजुर्गो के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेना उनकी दैनिक क्रियाकलापों का एक हिस्सा था ।
उनके सिद्धान्त प्रिय होने का एक उदाहरण यह है कि उन्हें एक बार आर्मी में जब अपने आफिसर्स द्वारा नानवेज खाने को कहा गया तो उन्होंने यह कहते हुए दृढ़ता से इंकार कर दिया कि मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ उनके इंकार की सजा उन्हें पूरे मैदान की घास उखाडने के आदेश के रूप में मिली । उन्होंने इस आदेश का पालन भी पूरी ईमानदारी से किया और जब घास उखाडते - उखाडते उनके हाथ छिल गये तो उनके आफिसर ने उन्हें गले लगाते हुए शाबाशी दी और कहा कि तुम जैस सिद्धान्त प्रिय व्यक्ति ही दुनिया में अपमा एवं अपने देश तथा परिवार का नाम रोशन करते हैं ।
श्री राजेन्द्र सिंह यादव ने अपनी 12 वर्षों की सेवा के दौरान श्रीलंका में तमिल चीतों के खिलाफ अपनी बहादुरी की मिशाल पेश करते हुए शांति सेना में विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किये गये ।
आपको पढ़ाई के प्रति भी विशेष लगाव था । आर्मी ज्वाइन करने की वजह से अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने खरगोन महाविद्यालय से स्वाध्यायी छात्र के रूप में बी.ए. का फार्म भरा था । SAME वर्ष अप्रैल मई में उन्होंने अपना बी.ए. फायनल का इम्तेहान भी दिया । अपने जीवन की अंतिम परीक्षा कारगिल में जारी आपरेशन विजय को विशिष्ट श्रेणी से उत्तीर्ण करने के चन्द रोज पश्चात ही उन्होंने बी.ए. की परीक्षा भी द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण कर ली । इसके पूर्व उन्होंने पचमढ़ी में चाय कोर्स भी सफलता पूर्वक पूरा किया था ।
श्री राजेन्द्र सिंह का विवाह लगभग दो वर्ष पूर्व 16 फर . 1997 को खरगोन जिले के निवासी श्री रामनारायण यादव की सुपुत्री प्रतिभा देवी ( कोमल ) से हुआ था
महाभारत के की तरह ही श्री यादव अपनी पहली औलाद का मुख देखने से पूर्व ही वीरगति को प्राप्त हो गए । यकीनन उनका पुत्र उन सौभाग्यशाली महापुरूषों में से होगा जो अपने पिता की बहादुरी के कारनामें सुन - सुनकर जवान होते हैं । आज समूचा निमाड ही नहीं वरन पूरा देश उनकी शहादत पर गमगीन है और हर दिल यही दुआ कर रहा है कि अमर शहीद श्री यादव की अपने पुत्र के रूप में पुनः वापसी हो । श्री यादव के अंतिम समय में साथ रहे जिला धार के निवासी 18 ग्रनेडियर्स के ही एक जांबाज सिपाही श्री बंशीधर वर्मा के अनुसार वे श्री यादव से मात्र कुछ ही फीट की दूरी पर थे कि उनका 30 मई की सुबह 5:30 बजे वायरलेस पर मेसेज आया कि हमारे मेजर साहब श्री राजेश सिंह अधिकारी शहीद हो गए हैं एवं मुझे भी गोली लग चुकी है । यहां दुश्मन काफी तादाद में है आप लोग पीछे लौट जाओ ।
जब हमारी ओर से श्री यादव को भी वापस लौट आने की सलाह दी गई तो उन्होंने यह कहते हुए इंकार किया कि मैं पीठ पर गोली नहीं खाऊंगा और अपनी अंतिम सांस तक दुश्मन से मुकाबला करूँगा । यह कहते हुए उन्होंने अपनी पोजीशन लेकर कई घुसपैठियों को मौत की नींद सुला दिया और स्वयं भी मातृभूमि की गोद में हमेशा के लिए सो गये ।
श्री वर्मा के अनुसार जब लगभग 15 दिन की घमासान लडाई के पश्चात् जब श्री यादव के पार्थिव देह को उठाया गया तो वह पोजीशन लिये हुए था यह बात साबित करती है कि उन्होंने अपने अंतिम समय तक दुश्मन का मुकाबला किस बहादुरी से किया ।
अमर शहीद लांस नायक राजेन्द्र सिंह यादव के पार्थिव शरीर को 16 जून को अग्नि को समर्पित किया गया । उक्त अवसर पर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री विजय लक्ष्मी साधौ , पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुभाष यादव , विधायक श्री परसराम डंडीर , कलेक्टर श्री भूपाल सिंह , एस.डी.एम. श्री राय , जिले के एस.पी. , डी.एस.पी. सहित महू छावनी से श्री यादव के साथ आए कर्नल श्री ठक्कर के अलावा ग्राम सरपंच श्री सदाशिव यादव , पूर्व विधायक श्री रायसिंह राठौर सहित लगभग 10 हजार लोगों ने शासकीय सम्मान के साथ श्री यादव को अश्रुपुरित विदाई दी । श्री यादव को मुखाग्नि उनके छोटे भाई ओंकार यादव ने दी।
कारगिल युद्ध में शहीद जवानों की सूची में मप्र से राजेंद्र यादव का था। इस योद्धा के बलिदान से निमाड़ की धरा भी धन्य हो गई। 30 वर्ष की आयु में जब युवा अच्छी नौकरी, शादी और कॅरियर को संवारने के ढेर सारे सपने देखते जवानी के इसी पड़ाव पर राजेंद्र यादव ने हंसते-हंसते भारत माता की रक्षा में अपने प्राण न्योंछावर कर दिए।
उनके सम्मान में गांव के अंदर शहीद स्मारक बनाकर प्रतिमा लगाई गई है। तथा ग्राम की सभी शासकीय विद्यालयों का नाम लांस नायक शहीद राजेन्द्र यादव जी के नाम पे रखा गया है कारगिल विजय दिवस और यादव ji के जन्मदिन , शहादत दिवस , गणतंत्र दिवस , स्वत्रंता दिवस पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते | तथा ग्राम के सभी विद्यालयो के विद्यार्थियों को रैली के रूप में शहीद स्मारक तक ले जाया जाता है तथा वहा पे उन्हें सलामी दी जाती है इसी दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी जिला कलेक्टर , अपर कलेक्टर, एसडीम, एसपी ,SDOP, एवं कुछ बड़े नेता अपना अमूल्य समय निकाल कर कार्यक्रम में आते है |
सांस्कृतिक कार्यक्रम की कुछ फोटो
वर्ष 2016 से ग्राम में शहादत दिवस पर कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आरम्भ किया गया जिसमे वीर रस के कवियो द्वारा शहीद जी कि प्रेणास्रोत बाते बताई जाती है । जिससे युवाओ में भारतीय सेना में शामिल होने का उत्साह बढ़ जाता है
तथा इसी अवसर पर ग्राम के होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाता है ।
जब तक सूरज चाँद रहेगा ,राजेन्द्र यादव नाम रहेगा
जय हिंद जय भारत
"Let us all be brave enough to die the death of a martyr, but let no one lust for martyrdom."
Thanks youre given some time for my Blog ..
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Jay hind
ReplyDeleteJay hind 👍
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ReplyDeleteजय हिंद
ReplyDeleteProud on u sir we miss u Ur the real hero🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteWell done good
ReplyDeleteJay hind 9977061706
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